सत्या के 20 साल: कैसे लिखा गुलज़ार ने ‘गोली मार भेजे में’, Film Companion
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फिल्म सत्या की बीसवीं सालगिरह पर मशहूर गीतकार और शायर गुलज़ार ने लोकप्रिय गाने गोली मार भेजे में लिखने की यादें साझा कीं।

फिल्म के निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने अपने असिस्टेंट अनुराग कश्यप और फिल्म के संगीतकार विशाल भारद्वाज को इस गाने के बारे में चर्चा करने के लिए मुझसे मिलने भेजा था। एक सिचुएशन पर आकर अनुराग ने एक लाइन सुझाई, गम के ऊपर बम लगाके, गम उड़ा दे।‘ मैंने इस लाइन पर कुछ भी करने से साफ मना कर दिया। लेकिन अनुराग तो अनुराग ठहरे – और उनकी अजीबोगरीब चीजों को लेकर आसक्ति इस लाइन को लेकर पक्का मन बना चुकी थी। वह बार बार कहते रहे कि गम के ऊपर बम बहुत ही झकास लाइन हो सकती है। तो मैंने उनसे कहा, गम नहीं होता, बच्चू, ग़म। पहले ग़म बोलना सीखो। मैंने भी जिद पकड़ ली थी कि ये लाइन किसी भी तरह से सिचुएशन के साथ फिट नहीं बैठती। ऐसे मवाली लोग जो पिस्तौलें लहराते हैं, मौका मिलते ही किसी की जान ले लेते हैं शाम होते ही दारू पीकर टल्ली हो जाते हैं और पागलों की तरह नाचते हैं, उन पर ये लाइन कहां से फिट बैठती है। विशाल ने भी अनुराग की सुझाई इस लाइन को लेकर बहुत ज़ोर लगाया लेकिन मैंने उसकी बात भी नहीं मानी और आखिर में सिचुएशन के हिसाब से अपनी लाइन उन्हें दी। और, इस तरह से पैदा हुई ये लाइन, गोली मार भेजे में, भेजा शोर करता है।

Adapted from English by Pankaj Shukla, Consulting Editor

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