एक ऐक्टर के लिए यही सबसे सही वक़्त है: सुमीत व्यास, Film Companion
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2014 में रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ परमानेंट रूममेट्स सुमीत व्यास के लिए बड़ा मौका लेकर आई। इस सीरीज़ में उनका किरदार एक ऐसे लड़के का रहा जो बड़ी शिद्दत से एक अनोखा सा दिखने वाला परफेक्ट मैरिज प्रपोज़ल तो बनाता है लेकिन इसमें सब कुछ गड़बड़ ही होता जाता है। इस सीरीज के चार साल बाद और तमाम दूसरे किरदार करने के बाद सुमीत व्यास एक बार फिर उसी मुहाने पर हैं। शशांक घोष की वीरे दे वेडिंग में उनका किरदार एक बहुत ही बेमौके का प्रपोज़ल करीना कपूर के सामने पेश करता है, हालात ये बनते हैं कि बेचारी को पास के एक टॉयलेट में जाकर मुंह छिपाना होता है। सुमीत का कहना है है कि वह किसी खांचे में फिट हो जाने जैसा महसूस नहीं करते और इस साल रिलीज़ हुई उनकी फिल्में इसकी ताक़ीद भी करती हैं। वेब सीरीज ऑफीशियल सीईओगिरी के रोल के अलावा आकर्ष खुराना की फिल्म हाई जैक में भी वह अपने किरदार को दमदार मानते हैं। इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की पहली स्टोनर फिल्म (नशे पर बनी फिल्में) भी माना जा रहा। फिल्म में सुमीत का किरदार रॉकेश एक डीजे है जो एक हवाई यात्रा के दौरान अपने साथ किसी वजह से नशे का सामान ले आता है इसके बाद फ्लाइट में तमाम ऐसी घटनाएं होती हैं, जो एक दूसरे से जुड़ती चली जाती हैं। सुमीत व्यास बता रहे हैं, कैसे उन्हें ये रोल मिला और ऐसी ही कौन सी दूसरी फिल्में हैं, जो उन्हें बेहद पसंद रही हैं।

इस साल नेटफ्लिक्स पर आपकी लिखी फिल्म लव पर स्क्वॉयर फुट रिलीज़ हुई। आपने एक वेबसीरीज़ में बतौर अभिनेता भी काम किया और अब एक के बाद एक दो फिल्में! आपको क्या लगता है ये किसी कलाकार के लिए मनोरंजन जगत में होने का सबसे सही समय है?

आपकी बात सही है। मौजूदा दौर में बहुत सारा अलग अलग तरह का काम हो रहा है। हर चीज़ काले और सफेद में बंटी हुई नहीं है। मेरे कहने का मतलब ये है कि अब आपको कहानी में सिर्फ या तो एक हीरो या फिर एक कंपलीट कैरेक्टर ऐक्टर ही नहीं होना होता। इन दोनों के बीच भी काफी सारा स्कोप बन रहा है और यही वो स्पेस जहां मैं फिट होता हूं। मैं एक साथ 20 लोगों की धुलाई नहीं कर रहा हूं या हवा में तैरती गोलियों को अपने हाथों से नहीं पकड़ रहा हूं, फिर भी मैं लीड रोल कर रहा हूं। तमाम दूसरी तरह की कहानियां भी हैं जो लोग बताना चाहते हैं और अब दर्शकों को ऐसी कहानियां देखने में दिलचस्पी भी है। ये बहुत ही आशाजनक माहौल है। ये इस बात का संकेत है कि हमें अपने खांचों से बाहर निकलना चाहिए और नए नए प्रयोग करने चाहिए। अगर अब नहीं करेंगे तो फिर कब करेंगे?

हाई जैक आपको कैसे मिली? क्या एक डीजे का किरदार करने के विचार ने आपको प्रभावित किया?

कुछ साल पहले जब हम ट्रिपलिंग लिख रहे थे, उन्हीं दिनों आकर्ष ने मुझे ये स्क्रिप्ट भेजी थी। उन्होंने कहा कि इसे पढ़ो और बताओ कि इसके बारे में मेरा क्या ख्याल है। मुझे याद है मैं कमरे में अकेले बैठकर ये स्क्रिप्ट पढ़ रहा था और पागलों की तरह सिर्फ हंसे जा रहा था- ऐसा हमेशा नहीं होता है। तो मैंने उन्हें बताया कि ये एक जबर्दस्त फिल्म हो सकती है और उन्हें इसे बनाना चाहिए। मुझे ये नहीं पता था कि इस तरह की फिल्म बनाने के लिए कौन पैसा लगाएगा क्योंकि ये कंटेंट के मामले में थोड़ी हटके फिल्म थी। लेकिन फैंटम ने इसमें दिलचस्पी दिखाई और एक कमाल की जोड़ी बन गई। मैंने इसका दूसरा ड्राफ्ट पढ़ा और आकर्ष को बताया कि अब ये पहले से बेहतर और मंजी हुई है। उन्होंने कहा, “हां, लेकिन तुमने एक बार भी नहीं कहा कि तुम मेरे साथ काम करना चाहते हो।” मुझे पता भी नहीं था कि वह इस फिल्म में ऐक्टिंग के लिए मेरे नाम पर विचार कर रहे थे, मुझे तो लगा था कि वह किसी बड़े स्टार के साथ ये फिल्म बनाएंगे। ढाई साल पहले तक शायद मैं इतना बिकाऊ भी नहीं था। लेकिन लोग मेरे बारे में जानते हैं और शायद इसी बात ने मुझे इस फिल्म में लेने के लिए उनकी मदद की।
मैं बहुत ज़्यादा पार्टियों या क्लबों में नहीं जाता हूं तो मैं चाहता था कि डीजे क्या करते हैं, ये जानने की कोशिश करूं। मैं न्यूक्लिया का एक कंसर्ट देखने गया जहां लोग पागल हुए जा रहे थे। मैंने उसे मेज पर कूदते और पागलों की तरह हरकतें करते देखा। फिर मैं उससे बैकस्टेज मिला और वह मुझे एक साधारण सा नेक इंसान लगा। उस वक्त वह बिल्कुल अलग ही लग रहा था। मैंने सोचा कि ये दिलचस्प है और मैंने उसका ये एक ही शरीर में आदमी होने वाला पंच पकड़ लिया। मैंने ये भी देखा कि उस शाम उसके संगीत में एक तरह का उठाव था। आमतौर पर क्या होता है खास तौर से फिल्मों में, डीजे बस कंसोल पर खड़े होकर बौराए से रहते हैं। ये वो चीज़ नहीं है जो आपसे लोग उम्मीद करते हैं। मैंने ये छोटी छोटी चीज़ें समझीं और इन्हें अपने किरदार के विस्तार में जोड़ा।
नशा करना मेरे जीवन का हिस्सा नहीं है। मुझे हमेशा इससे बहुत डर लगा रहता है- क्या होगा अगर में ये लत छोड़ नहीं पाया तो? मैं अपने कुछ “कूल” दोस्तों के साथ रहा, इंटरनेट पर ये रिसर्च करने की कोशिश की कि नशा करने के लक्षण क्या होते हैं ताकि मैं फिल्म में इसे परदे पर दिखा सकूं।

इस फिल्म को एक स्टोनर कॉमेडी (भंगेड़ी फिल्म) कहा जा रहा है, एक ऐसा जॉनर जो हिंदी सिनेमा में है ही नहीं। इस तरह की आपकी पसंद की फिल्में और कौन सी हैं?

नशा इस फिल्म का बहुत छोटा सा हिस्सा है – कुछ लोग टेंशन में आकर नशा कर लेते हैं और अजीब सी हरकतें करने लगते हैं। ये ड्रग्स पर बनी फिल्म नहीं है, ये एक विमान अपहरण की कहानी है जिसमें लोचा हो जाता है। मैं बिग लेबोव्स्की (1998) का बहुत बड़ा फैन रहा हूं और हमेशा से कुछ ऐसा ही करना चाहता था। मुझे गो गोआ गॉन (2013) भी बहुत पसंद है – ये वाकई में एक मज़ेदार फिल्म है जिसमें मेरे सारे दोस्तों ने काम किया। लेकिन, मेरे हिसाब से हाई जैक में पहले की इन फिल्मों से ज्यादा कुछ दांव पर लगा है। उड़ान के दौरान बीच में एक हवाई जहाज का अपहरण हो रहा है। ये एक बहुत ही गंभीर स्थिति है, लेकिन एक ऐसी स्थिति जिसमें किरदार सारे नौटंकीबाज़ हैं।

अब जबकि चारों तरफ से काम आ रहा है तो आप कैसे फैसला करते हैं कि किसको ज्यादा वक़्त देंगे? क्या आप ये देखते हैं कि आपका किरदार कैसा है और आप प्रोजेक्ट में क्या कर रहे हैं या फिर ये देखते हैं कि सेट अप कितना बड़ा है, कितने लोगों तक ये पहुंचेगा और कितने लोग इसे देखेंगे?

सबसे पहले मैं थोड़ा विस्तार से चीजों को देखता हूं कि जो स्क्रिप्ट बन रही है वह मनोरंजक है कि नहीं, चुस्त दुरुस्त है कि नहीं, अच्छी है कि नहीं क्योंकि अगर ऐसा नहीं है तो फिर प्रोजेक्ट काम करेगा नहीं। फिर मैं देखता हूं कि इसमें ऐसा कुछ तो नहीं है जो पहले ही मैं कर चुका हूं। मैं अपने ही किरदार दोहराना नहीं चाहता- इससे मुझे बोरियत होती है। कभी कभी मैं ये कर भी लेता हूं क्योंकि स्क्रिप्ट इतनी दमदार होती है कि मैं इसका हिस्सा बनना ही चाहता हूं। अगर मैं हाई जैक की कास्टिंग कर रहा होता तो मैं डीजे रॉकेश के रोल में खुद को कभी नहीं सोच पाता। इसीलिए जैसे ही मुझे इसका ऑफर मिला मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। ये एक बड़ा मौका था।
मैं ये भी सोचता हूं कि ऐसा क्या है जो मैं इस प्रोजेक्ट में ला सकता हूं और जो दूसरे नहीं ला सकते। ये हर ऐक्टर को सोचना चाहिए – सिर्फ एक हिट फिल्म या एक हिट फ्रैंचाइज़ या एक बड़े डायरेक्टर के साथ काम करना ही सब कुछ नहीं है, ये भी देखना चाहिए कि आप इस प्रोजेक्ट को क्या दे पा रहे हैं। मैं कभी मीडियम के बारे में भी नहीं सोचता- मेरे लिए इसमें शामिल हो रहे लोग ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सालों काम करने के बाद, मैं इतना तो समझ ही चुका हूं कि ये पता लगा सकूं, ये लोग जो सोच रहे हैं, वह कर भी पाएंगे कि नहीं। कई बार लोगों के पास आइडिया तो कमाल के होते हैं लेकिन वे इतने काबिल नहीं होते कि इसे बना पाएं। फिर ये डब्बा हो जाता है और जो लोग भी इसमें शामिल होते हैं उनके लिए एक बहुत ही खराब अनुभव देकर जाता है। मैं कोशिश करता हूं और इस तरह के सेट अप्स से दूर रहता हूं। जहां तक हाई जैक की बात है तो मैं आकर्ष को जानता हूं, हर नए प्रोजेक्ट में साथ-साथ जो हम करते हैं, हमारा भरोसा एक दूसरे पर बढ़ता जाता है। मैंने अपने साथ के सभी ऐक्टर्स को काम करते देखा है। फैंटम ने भी काफी लीक से अलग हटकर काम किया है और मैं उनके साथ काम करने को उत्सुक भी था।

आपने कहा कि लिखना बहुत ही मुश्किल काम है। फिल्मों, एंडोर्समेंट और प्रमोशन्स के बीच इसके लिए वक़्त कैसे निकालते हैं आप?

अब ये बहुत मुश्किल है, मैं कम लिखता रहा हूं। आकर्ष और मैं पिछले छह महीनों से ट्रिपलिंग का सीजन 2 लिख रहे हैं। इसमें इतना वक़्त इसलिए भी लगा क्योंकि हम दोनों अलग अलग कामों में व्यस्त थे। एक ऐक्टर होना आसान नहीं है। तमाम दूसरी चीजें इसके लिए आपको करनी होती हैं – आपको खुद को पेश करना होता है, नए लोगों से मिलना होता है, कहानियां सुननी होती हैं। कलाकारी तो इस सबमें तो बस 40 फीसदी ही होती है, बाकी का 60 फीसदी तो यही पहेली सुलझाना होता है। जब आपको एक नई दुनिया बसानी हो, एक नई कहानी सोचनी हो तो आपको ये सब एकदम बंद कर देना होता है। मैंने लिखने को मुश्किल इसलिए बताया क्योंकि एक ऐक्टर के तौर पर आपको सिर्फ अपना हिस्सा करना होता है, लेकिन एक लेखक के तौर पर आपको अपने हर किरदार को जीना होता है। आपको अपने हर किरदार का इतिहास बुनना होता है, आपको वैसे ही रीएक्ट करना होता है जैसे आपके किरदार करेंगे। मैं वाकई एक थ्रिलर लिखना चाहता हूं, मुझे नहीं पता कि ये क्या आकार लेगा, लेकिन मैं इसके लिए कोशिश करने को बहुत उत्सुक हूं।

आखिर में, एक सवाल है कि अगर आपके पास ये ताक़त हो तो ऐसी कौन सी चीज़ आप बदलना चाहेंगे जो नए लोगों की जिंदगी इस इंडस्ट्री में थोड़ा आसान बना दे – क्या होगा ये?

मेरी ये दिली इच्छा है कि यहां लोगों के चेहरों से ज्यादा उनकी काबिलियत को तारीफ मिले – इससे बहुत मदद मिलती है। अगर लोगों की प्रतिभा को सिर्फ खुश करने भर को नहीं बल्कि थोड़ा और खुलकर साथ मिलता तो ये बहुत अच्छा होता। मुझे लगता है कि जब जब किसी काबिल कलाकार को सपोर्ट मिला है, इसके नतीजे अच्छे आए हैं, नवाजुद्दीन सिद्दीकी इसका एक उदाहरण हैं। दूसरे इरफ़ान खान हैं। यहां तक कि सुशांत सिंह राजपूत – इन्होंने अपने भीतर कुछ देखा और फिर इसी के पीछे लग गए।

Adapted from English by Pankaj Shukla, consulting editor

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